भाई दूज की कविता, Bhai Dooj Kavita

भाई दूज की कविता

भाई दूज की कविता

Bhai Dooj Kavita

  • भाई दूज की पूजा कर,
    करती हूँ उसका इंतज़ार.
  • कब आएगा मुझसे मिलने ,
    कब सजेगा मेरा द्वार.
  • सजा कर थाल बैठी हूँ भाई,
    मिष्ठान और मेवे लाई हूँ भाई.
  • मत खेल मुझसे आँख मिचौली,
    प्यार से भर दे मेरी झोली.
  • कब आएगा मेरे द्वार ,
    कब खत्म होगा ये इन्तजार.|

Happy Bhaiya Dooj poem

  • भाई दूज पर भालू ने,
    हथनी को बहन बनाया।
  • उसके हाथों से माथे पर,
    लाल तिलक लगवाया।
  • फिर बोला वह प्यारी बहना,
    मीठा तो खिलवाओ।
  • हथनी बोली भैया पहले,
    सौ का नोट दिखाओ।

Happy Bhai Dooj poem

मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर,
कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।
लग जाये किसी की न तुमको नजर,
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

Happy Bhai Dooj Kavita

चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,
उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,
कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

भाई दूज की बधाई की कविता

थालियाँ रोली चन्दन की सजती रहें,
सुख की शहनाइयाँ रोज बजती रहें,
पूर्ण हों भाइयों की सभी साधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

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भाई दूज की बधाई की शुभकामनायें पर कविता

रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

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