(Bhai Dooj Yam Dwitiya Date 2017 Muhurat

इस साल भाई दूज कब मनाई जाएगी ?

भाई दूज

Bhai Dooj Date 2017 Muhurat

हेलो दोस्तों इस साल भी भाई दूज कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की दूज को मनाया जाता हैं. यह भाई बहन के प्रेम का त्यौहार है, यह दिवाली पर्व का सबसे अंतिम दिन होता हैं. इस साल वर्ष 2017 में भाई दूज 2017 को यह 1 नवंबर को मनाई जाएगी.

भाई दूज पूजा काल 12:40 से 14:33
अवधि 1 घंटा 53 मिनट
  • भाई दूज महत्व एवम विधि (Bhai Dooj Mahatva Puja Vidhi)

यह भाई बहन के प्रेम का त्यौहार हैं. इसमें बहन अपने भाई को घर बुलाती हैं उसे तिलक करती हैं भोजन करवाती हैं और उसकी मंगल कामना करती हैं. इस दिन भाई बहन यमुना नदी में स्नान कर यमराज की पूजा करते हैं तो उनका भय समाप्त होता हैं. कहा जाता हैं इस दिन अगर यमुना नदी में स्नान किया हो और अगर सांप भी काट ले तो कोई असर नहीं होता.

कैसे की जाती हैं भाईदूज की पूजा ?  Bhai Dooj Puja Vidhi

  1. इस दिन बहने जल्दी से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनती हैं. फिर ऐपन बनाकर उससे अपने हाथो के छापे बनाकर उनकी पूजा करती हैं.
  2. कुछ बहने प्रथानुसार ऐपन से सात बहनों एवम एक भाई की आकृति बनाती हैं, इसके साथ ही एक तरफ सांप, बिच्छु आदि विपत्ति के रूप में बनाती हैं. फिर कथा पढ़ कर मुसल से भाई पर आने वाली विपत्ति को मार कर उसकी रक्षा करते हैं. इस प्रकार अपने भाई की खुशहाली के लिए बहने भगवान से प्रार्थना करती हैं.
  3. पूजा के बाद बहने अपने भाई को तिलक कर आरती उतारती हैं इसके बाद ही स्वयं कुछ खाती हैं.
  • भाई दूज की कथा कहानी  Bhai Dooj story Kahani

भाई दूज का यह दिन किस तरह शुरू हुआ इसके पीछे की कहानी :

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यमराज एवम यमुना दोनों भाई बहन सूर्य देव और छाया की संताने हैं. दोनों में बहुत प्रेम था. बहन हमेशा अपने भाई को मिलने बुलाती लेकिन कार्य की अधिकता के कारण भाई बहन से मिलने नहीं जा पाता. एक दिन यमराज नदी के तट पर गया वही उसकी मुलाकात अपनी बहन यमुना से हुई. उससे मिलकर बहन बहुत खुश हुई. ख़ुशी में बहन ने अपने भाई का स्वागत किया, उसे मिष्ठान खिलायें. वह दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया का दिन था. तब ही यमी ने कहा कि भाई यमराज आज के बाद प्रति वर्ष आप मुझसे इसी दिन मिलने आओगे. तभी से यह दिन भाईदूज के नाम से जाना जाता हैं.

कहते हैं इस दिन जो भी भाई यमुना नदी का स्नान करता हैं उसे उस दिन मृत्यु का भागी नहीं बनना पड़ता. इस दिन उसके सारे संकट टल जाते हैं.

भाई दूज की रोचक कथा  Bhai Dooj Katha

एक बूढी औरत के सात बेटे और एक बेटी थी. बेटो पर सर्प की कुदृष्टि थी. जैसे ही उसके बेटे की शादी का सातवा फैरा होता सर्प उसे डस लेता. इस प्रकार बुढ़िया के छ: बेटे मर गए. अब उसने एक बेटे की शादी नहीं की. लेकिन बेटे को इस तरह से अकेला देख उसकी बहन को बहुत दुःख हुआ. उसने उपाय करने की सोची जिसके लिए वो एक ज्योतिष के पास गई. ज्योतिष ने उससे कहा तेरे भाईयों पर सर्प की कुदृष्टि हैं. अगर तू उसकी सारी बलाये अपने पर लेले तो उसकी जान बच सकती हैं. बहन ने यह बात सुनते ही रोद्र रूप सा ले लिया. अपने मायके आकर बैठ गई और भाई कुछ भी करे उसके पहले उसे करना होता था. अगर कोई ना माने तो जोर-जोर से लड़ती और भाई को गलियाँ देती. ऐसे में सब डरकर उसकी बात मान लेते. सभी उसकी निंदा करने लगे. पर उसने भी भाई की रक्षा की ठान रखी थी.

अब उसके भाई की शादी का वक्त निकट आया, जैसे ही भाई को सेहरा बांधने को जीजा उठा. बहन चिल्लाने लगी कि पहले मेरा मान करो. मैं सहरा पहनूंगी. सबने उसे सेहरा दे दिया. उसके अंदर एक सांप था, जिसे बहन ने फेंक दिया. अब भाई घोड़े पर बैठा तो बोली की पहले मैं बैठूंगी वहाँ भी उसकी सुनी, जैसे ही वो बैठी घोड़े पर एक सांप था उसे भगाया. फिर बारात आगे निकली. जब दुल्हे का स्वागत हुआ. तब भी इसने कहा पहले मेरा स्वागत करो जैसे ही उसके गले में माला डाली उसमे भी सांप था. उसने उसे भी फेका. अब शादी शुरू हुई उस वक्त सांपो का राजा खुद डसने आया. तब बहन ने उसे पकड़ कर टोकनी में ढक दिया. फेरे होने लगे. तब नागिन बहन के पास आई बोली मेरे पति को छोड़. तब बहन बोली पहले मेरे भाई से अपनी कुदृष्टि हटाओ तब तेरे पति को छोडूंगी. नागिन ने ऐसा ही किया. इस प्रकार बहन ने दुनियाँ के सामने अपने आप को कर्कश साबित किया, लेकिन अपने भाई के प्राणों की रक्षा की.

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