Childrens Day In Hindi- बाल दिवस पर निबंध

Childrens Day In Hindi- बाल दिवस पर निबंध

Childrens Day In Hindi- बाल दिवस पर निबंध

Childrens Day In Hindi- बाल दिवस पर निबंध

बाल दिवस  Bal Divas :

बाल दिवस : 14 नवंबर  को  मनाया जाता है।
Bal Divas 14 November

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन 14 नवंबर 1889, इलाहाबाद में हुआ था  और इसे ‘बाल-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

बाल दिवस की शुरुवात

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बाल दिवस की नींव 1925 में रखी गई थी, जब बच्चों के कल्याण पर विश्व कांफ्रेंस में बाल दिवस मनाने की घोषणा हुई. 1954 में दुनिया भर में इसे मान्यता मिली. संयुक्त राष्ट्र ने यह दिन 20 नवंबर के लिए तय किया लेकिन अलग अलग देशों में यह अलग दिन मनाया जाता है. कुछ देश 20 नवंबर को भी बाल दिवस मनाते हैं. 1950 से बाल संरक्षण दिवस यानि 1 जून भी कई देशों में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है.यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि हर बच्चा खास है और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उनकी मूल जरूरतों और पढ़ाई लिखाई की जरूरतों का पूरा होना बेहद जरूरी है. यह दिन बच्चों को उचित जीवन दिए जाने की भी याद दिलाता है.

भारत में यह दिन स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन के मौके पर मनाया जाता है. कहा जाता है कि पंडित नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे इसलिए बाल दिवस मनाने के लिए उनका जन्मदिन चुना गया था

बाल दिवस बच्चों के लिए महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन स्कूली बच्चे बहुत खुश दिखाई देते हैं। वे सज-धज कर विद्यालय जाते हैं। विद्यालयों में बच्चे विशेष कार्यक्रम आयोजित कराये जाते हैं। वे अपने चाचा नेहरू को  प्रेम से स्मरण करते हैं।

बाल मेले में बच्चे अपनी बनाई हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाते हैं। इसमें बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। नृत्य, गान, नाटक आदि प्रस्तुत किए जाते हैं। नुक्कड़ नाटकों के द्वारा आम लोगों को शिक्षा का महत्व बताया जाता है।  प्रतियोगित में विजयी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार दिए जाते हैं । बालको में फल और मिठाइयां बांटी जाता हैं ।

भारती की राजधानी दिल्ली में भी इण्डिया गेट के निकट ‘नेशनल स्टेडियम’ में छात्र-छात्राएं एकत्रित होते हैं । वहाँ पर बच्चे सामूहिक व्यायाम, ड्रिल और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं । इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित रहते हैं और अपने भाषण में बच्चों को देशभक्ति और नेहरू जी के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देते हैं ।

अन्त में बच्चों में नेहरू जी का स्मृति चिन्ह गुलाब, मिठाइयां और पुरस्कार वितरित किये जाते हैं । इसी तरह के कार्यक्रम राज्यों की राज्य सरकारें भी आयोजित करती हैं । बाल दिवस पर केवल बाल-कल्याण के बारे में ही विचार करना चाहिए । उनकी प्राथमिक शिक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए । बाल मजदूरी प्रथा समाप्त करनी चाहिए । प्रतियोगिता में अधिक से अधिक छात्र भाग लें इस बात का ध्यान अध्यापक को रखना चाहिए ।
बच्चे देश का भविष्य हैं। इसलिए हमें सभी बच्चों की शिक्षा की तरफ ध्यान देना चाहिए। खास तौर पर बाल श्रम रोधी कानूनों को सही मायनों में पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। अनेक कानून बने होने के बावजूद बाल   श्रमिकों की संख्‍या में वर्ष दर वर्ष वृद्धि होती जा रही है। इन बच्चों का सही स्थान कल-कारखानों में नहीं बल्कि स्कूल है।

बाल दिवस के अवसर पर केंद्र तथा राज्य सरकार बच्चों के भविष्य के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा करती है।  

बच्चों के रहन-सहन के स्तर ऊंचा उठाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इन्हें स्वस्थ, निर्भीक और योग्य नागरिक बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह बाल दिवस का संदेश है।

हमें बाल श्रम रोधी कानूनों को सही मायनों में पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। अनेक कानून बने होने के बावजूद बाल श्रमिकों की संख्‍या में वर्ष दर वर्ष वृद्धि होती जा रही है! देश के बच्चों का सही स्थान कल-कारखानों में नहीं बल्कि स्कूल है।

गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस की तरह ही बाल दिवस भी बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है । इस समारोह में बच्चे अपनी प्रतिभा को निखारते हैं और सर्वागीण विकास की ओर अग्रसर होते हैं । बाल दिवस पर अध्यापकों के अतिरिक्त अभिभावकों का भी पूर्ण सहयोग होना चाहिए ।

बाल दिवस पर ये क्यों जरुरी है:

बच्चों के उज्जवल भविष्य को बनाने के लिये उनमें सुधार के साथ देश में बच्चों के महत्व, वास्तविक स्थिति के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिये हर साल बाल दिवस मनाया जाना बहुत जरुरी है क्योंकि वह देश के भविष्य हैं। बाल दिवस उत्सव सभी के लिये मौका उपलब्ध कराता है खासतौर से भारत के उपेक्षित बच्चों के लिये। बच्चों के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारीयों के एहसास के द्वारा उन्हें अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। ये देश में बच्चों के बीते हुई स्थिति और देश के उज्जवल भविष्य के लिये उनकी सही स्थिति क्या होनी चाहिये के बारे में लोगों को जागरुक करता है। ये केवल तब ही मुमकिन है जब सभी लोग बच्चों के प्रति अपनी जिम्मदारी को गंभीरता से समझें।

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