धनतेरस पूजा 2016

Dhanteras Puja Vidhi In Hindi धनतेरस पूजा विधि शुभ महूर्त महत्व

Dhanteras Puja Vidhi In Hindi धनतेरस पूजा विधि शुभ महूर्त  महत्व

धनतेरस पूजा 2016

धनतेरस पूजा 2016

धनतेरस पूजा शुभ महूर्त

28 अक्टूबर, 2016 (शुक्रवार)

Shubh Mahurat / शुभ महूर्त

17:35 to 18:20

...

त्रयोदशी तिथि /Tryodishi Tithi

16:15, 27 अक्टूबर 2016 से 18:20, 28 अक्टूबर 2016 तक

भारत देश में त्योहारों का बड़ा अनोखा संगम हैं ,यहाँ पर हर धर्म में अलग अलग त्यौहार मनाये जाते हैं लेकिन दीपावली का त्यौहार तो हर धर्म के लोग मनाते हैं ,दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस का त्यौहार छोटी दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता हैं जो कई धन के देवता कुबेर जी की पूजा की जाती है |और इस दिन लोग बाजारों से नये सामान की खरीदारी करते हैं इस दिन कई लोग तो बड़े साधन का विधि विधान से महूर्त कर के अपने घर लाते हैं | इस दिन कोई भी सामन लेना बहुतही शुभ माना जाता हैं |

धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती भी होती है। जो आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।धनतेरस हिंदू त्योहारों में बहुत अधिक महत्व रखता है। इस दिन लोग नई चीजें अपने घर लातें है साथ ही इस दिन गणेश लक्ष्मी घर लाएं जाते है। इस दिन की मान्यता है कि इस दिन कोई किसी को उधार नही देता है। इसलिए सभी नई वस्तुएं लातें है। इस दिन लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ-साथ यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन की बहुत अधिक महत्व है।

धनतेरस हिंदू त्योहारों में बहुत अधिक महत्व रखता है। इस दिन लोग नई चीजें अपने घर लातें है साथ ही इस दिन गणेश लक्ष्मी घर लाएं जाते है। इस दिन की मान्यता है कि इस दिन कोई किसी को उधार नही देता है। इसलिए सभी नई वस्तुएं लातें है। इस दिन लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ-साथ यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन की बहुत अधिक महत्व है।

धनतेरस पूजा :-
धनतेरस और दीपावली दोनों त्योहारों में धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्त्व है. ये दिन कारोबारियों के लिए भी खास महत्त्व रखता है क्योकि धरणा है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन से समृद्धि, खुशियाँ और सफलता प्राप्त होती है. धनतेरस से ठीक 2 दिन बाद दीपावली मनाई जाती है. धन का अर्थ ही समृद्धि से होता है और तेरस का अर्थ होता है तेरहवां दिन. धनतेरस के दिन से ही हर घर, ऑफिस आदि में सफाई होने लगती है और उन्हें फूलो, रंगोलियों और लाइट से सजाया जाने लगता है और लक्ष्मी माता के आगमन की तैयारियों को शुरू किया जाता है. धनतेरस के दिन माता के पैरो के छोटे छोटे चिह्नों को घर में स्थापित किया जाता है और शाम को 13 दीपक जलाकर उनकी पूजा की जाती है.

धनतेरस पूजन विधि :-
धनतेरस की संध्या में यमदेव निमित्त दीपदान किया जाता जो कई यजमान अपने घरों के दक्षिण में और दीपक का मुहं दक्षिण दिशा में होना चाहिए है। फलस्वरूप उपासक और उसके परिवार को मृत्युदेव यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है। विशेषरूप से यदि गृहलक्ष्मी इस दिन दीपदान करें तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है।

बर्तन खरीदने की परंपरा को पूर्ण अवश्य किया जाना चाहिए। विशेषकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदे क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का अहम धातु है। इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है।

व्यापारी इस विशेष दिन में नए बही-खाते खरीदते हैं जिनका पूजन वे दीवाली पर करते हैं।
धनतेरस के दिन चाँदी खरीदने की भी विशेष परंपरा है। चन्द्रमा का प्रतीक चाँदी मनुष्य को जीवन में शीतलता प्रदान करता है। चूंकि चाँदी कुबेर की धातु है, धनतेरस पर चाँदी खरीदने से घर में यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा की वृद्धि होती है। संध्या में घर मुख्य द्वार पर और आँगन में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और दीवाली का शुभारंभ होता है।

कारोबारियों के लिए धनतेरस का खास महत्व
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस की पूजा के साथ ही दीपावली के आयोजन शुरू हो जाते हैं। कारोबारियों के लिए धनतेरस का खास महत्व होता है क्योंकि धारणा है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है। लक्ष्मी के पैरों के संकेत के तौर पर रंगोली से घर के अंदर तक छोटे छोटे पैरों के चिह्न बनाए जाते हैं। शाम को 13 दिए जला कर लक्ष्मी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है। इस दिन कारोबारी व व्यवसायी अपने पुराने बही खातों को बंद कर नए खातों की शुरुआत करते हैं |

धनतेरस के टोटके : –
धनतेरस के दिन पांच रुपए का साबुत धनिया खरीदें। इसे संभालकर पूजा घर में रख दें।

दीपावली की रात लक्ष्मी माता के सामने साबुत धनिया रखकर पूजा करें। अगले दिन प्रातः साबुत धनिया को गमले में या बाग में बिखेर दें। माना जाता है कि साबुत धनिया से हरा भरा स्वस्थ पौधा निकल आता है तो आर्थिक स्थिति उत्तम होती है।

धनिया का पौधा हरा भरा लेकिन पतला है तो सामान्य आय का संकेत होता है। पीला और बीमार पौधा निकलता है या पौधा नहीं निकलता है तो आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।देश के कुछ भागों में यह टोटका काफी प्रचलित है।

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