dussehra par nibandh in hindi दशहरा विजयादशमी निबंध कविता

dussehra par nibandh in hindi दशहरा विजयादशमी निबंध कविता

dussehra par nibandh in hindi दशहरा विजयादशमी निबंध कविता

dussehra par nibandh in hindi दशहरा विजयादशमी निबंध कविता

 

October 11, 2016
September 30, 2017
दशहरा (विजयदशमी या आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पुरे भारत में ख़ुशी के साथ मनाया जाता है।मर्यादा पुर्शोतम भगवान राम ने इसी दिन राक्षस रावण का वध कर धरती माता को उसके पापों से मुक्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा।

इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है|

दशहरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिन्दू त्यौंहार है जो पूरे भारत के लोगों के द्वारा हर साल बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये एक धार्मिक और पारंपरिक उत्सव है जिसे हर बच्चों को जानना चाहिये। विद्यार्थियों के ज्ञान और कुशलता को बढ़ाने में स्कूल औऱ कॉलेजों में निबंध लेखन एक सामान्य और असरदार तरीका है। हम यहाँ विद्यार्थियों के लिये दशहरा पर निबंध और कई पैराग्राफ उपलब्ध करा रहे है जिसका प्रयोग विद्यार्थी भविष्य के किसी प्रतियोगिता के लिये कर सकते है।

ऐतिहासिक व पोराणिक मान्यताओं और प्रसिद्ध हिन्दू धर्मग्रंथ रामायण के अनुसार ऐसा उल्लिखित है कि भगवान राम ने रावण को मारने के लिये देवी चंडी की पूजा की थी। लंका के दस सिर वाले राक्षस राजा रावण ने अपनी बहन शूपर्णंखा की बेइज्जती का बदला लेने के लिये राम की पत्नी माता सीता का हरण कर लिया था। तब से जिस दिन से भगवान राम ने रावण को मारा उसी दिन से दशहरा का उत्सव मनाया जा रहा है।

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दशहरा या विजयदशमी के अवसर पर राम लीला या बड़े मेले के आयोजन के द्वारा के लोग दसवाँ दिन मनाते है| इस दिन रावण का पुतला बनाकर एक व्यक्ति राम की भूमिका निभाता हुआ ,उस रावण के पुतले का वध करता है और पुतले के वध के बाद बच्चे और बड़े लोग पटाखे आदि फोड़ते है | इस दिन सब लोग अपने घरो में कई प्रकार के व्यंजन ,पकवान बनाते है और श्री राम के भोग लगाते हैं | सब लोग ख़ुशी से रावण का वध करके दशहरा मनाते हैं

विजय दशमी / विजयादशमी / दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह भारत का ‘राष्ट्रीय त्योहार’ है। रामलीला में जगह–जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है। क्षत्रियों के यहाँ शस्त्र की पूजा होती है। ब्रज के मन्दिरों में इस दिन विशेष दर्शन होते हैं। इस दिन नीलकंठ का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है।

विजयदशमी के दिन मां दुर्गा पृथ्वी से अपने लोक के लिए प्रस्थान करती हैं इसलिए विजयदशमी को यात्रा तिथि भी कहते हैं। विजयादशमी के दिन किसी भी दिशा में यात्रा करने पर दोष नहीं लगता है। उत्तर भारत में यह भी मान्यता है कि विजयादशमी के दिन प्रातः नीलकंठ का दर्शन शुभ होता है। इस दिन नीलकंठ देखने से पूरा साल सुखमय व्यतीत होता है।

इसी तरह उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों एवं महाराष्ट्र में ऐसी मान्यता है कि विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष के पत्तों को घर में लाकर रखने से घर में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है। विजयादशमी के दिन ‘शमी वृक्ष'(जाटी ,खेजड़ी के पेड़ की टहनी) के पत्तों को घर लाने की परंपरा की शुरूआत अयोध्या के राजा रघु के समय में हुई।

इस दिनको ‘विजयादशमी’का नाम प्राप्त हुआ ।

दशहरा पर कविता

बुराई का रूप अब भ्रष्टाचार है
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं
देश रूपी लंका में कोन राम बनेगा
यहाँ तो अब बस मिलावटी व्यवहार हैं

त्योहार के इस देश में
हर त्योहार का है अपना मान
प्रेम से मनाने में ही हैं इनकी शान
चलो रचाए दशहरे की धूमधाम

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