Goga Navami 2017 date

Goga Navami 2017 date राजस्थान के लोक देवता गोगाजी जाहर पीर गुग्गा नवमी

Goga Navami 2017 date राजस्थान के लोक देवता गोगाजी जाहर पीर

Goga Navami 2016 date

विक्रमी संवत के माह भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की नवमी को गुग्गा नवमी मनाई जाती है. गुग्गा नवमी इस वर्ष 16 अगस्त2017 को मनायी जाएगी |

          राजस्थान के पांच पीरों में से गोगाजी का नाम सर्व प्रथम लिया जाता हैं |  

                                                  पाबू हड्बू रामदेव मांगलिया मेहा |
                                                  पांचो पीर पधारज्यो गोगाजी गेहा ||

गोगा जाहर पीर का जन्म मंगलवार नवमी तिथि को हुआ जो आज गुगा नवमी के नाम से जानी जाती है |कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन आती है |गोगा जी की कथा बहुत ही दिलचस्प हैं | जिनको सुनते हैं तो कुछ अलग आनंद की अनुभूति होती हैं |

गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हे जहरवीर गोगा जी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का एक शहर गोगामेड़ी है। यहां भादव शुक्लपक्ष की नवमी को गोगाजी लोक देवता का मेला भरता है। इन्हे हिन्दु और मुस्लिम दोनो पूजते है| गोगा जी को सांपो का देवता माना जाता हैं |एक बार गोगाजी की पत्नी कैलम दे को सांप ने डस लिया तो गोगाजी ने मन्त्र का आह्वान करने से प्रथ्वी के सारे सांप आ गये और गोगाजी ने एक कड़ाई में गर्म तेल में सारे सांपो को जला दिया | तो सांपो का नागराज ने स्वयं आकर गोगाजी से प्रार्थना की और गोगाजी की पत्नी का जहर निकला |

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वीर गोगाजी गुरुगोरखनाथ के परमशिस्य थे। चौहान वीर गोगाजी का जन्म विक्रम संवत 1003 में चुरू जिले के ददरेवा गाँव में हुआ था सिद्ध वीर गोगादेव के जन्मस्थान, जो राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा ददरेवा में स्थित है। जहाँ पर सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं। कायम खानी मुस्लिम समाज उनको जाहर पीर के नाम से पुकारते हैं तथा उक्त स्थान पर मत्‍था टेकने और मन्नत माँगने आते हैं। इस तरह यह स्थान हिंदू और मुस्लिम एकता का प्रतीक है। मध्यकालीन महापुरुष गोगाजी हिंदू, मुस्लिम, सिख संप्रदायों की श्रद्घा अर्जित कर एक धर्मनिरपेक्ष लोकदेवता के नाम से पीर के रूप में प्रसिद्ध हुए। गोगाजी का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) चौहान वंश के राजपूत शासक जैबर (जेवरसिंह) की पत्नी बाछल के गर्भ से गुरु गोरखनाथ के वरदान से भादो सुदी नवमी को हुआ था। चौहान वंश में राजा पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी वीर और ख्याति प्राप्त राजा थे। गोगाजी का राज्य सतलुज सें हांसी (हरियाणा) तक था।

लोकमान्यता व लोककथाओं के अनुसार गोगाजी को साँपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। लोग उन्हें गोगाजी चौहान, गुग्गा, जाहिर वीर व जाहर पीर के नामों से पुकारते हैं। यह गुरु गोरक्षनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। राजस्थान के छह सिद्धों में गोगाजी को समय की दृष्टि से प्रथम माना गया है।जयपुर से लगभग 250 किमी दूर स्थित सादलपुर के पास ददरेवा में गोगादेवजी का जन्म स्थान है।

गोगा का वैवाहिक जीवन: गोगा के वैवाहिक जीवन के संबंध में ऐतिहासिक तथ्यों का अभाव है। लोक-कथाओं में उनकी पत्नियों के रूप में राणी केलमदे व राणी सुरियल के नामों का उल्लेख है। राणी केलमदे को पाबूजी के भाई बुड़ोजी की पुत्री बताया गया है। समय का अंतराल अधिक होने के कारण यह सत्य प्रतीत नहीं होता। राणी सुरियल का वर्णन कामरूप देश की राजकुमारी के रूप में किया गया है।

जाहरवीर गोगाजी का यह मंदिर आज हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाईयों में समान रूप से श्रद्वा का केंद्र है। सभी धर्मो के भक्तगण यहां मंदिर के दर्शनों हेतु भादव मास में उमड़ पडते हैं। राजस्थान का यह ददरेवा नाम का छोटा सा गांव भादव मास में एक नगर का रूप ले लेता है और लोगों का अथाह समुद्र बन जाता है। गोगाजी के भक्त पीले वस्त्र धारण करके अनेक प्रदेशों से यहां आते हैं। सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश व बिहार के भक्तों की होती है। नर-नारियां व बच्चे सभी पीले वस्त्र धारण करके विभिन्न साधनों से ददरेवा धाम पहुंचते हैं। स्थानीय भाषा में इन्हें पूरबिये कहते हैं। भक्तजन अपने-अपने निशान जिन्हे गोगाछड़ी भी कहते हैं लेकर मनौति मांगने नाचते-गाते ढप व डमरू बजाते व कुछ एक सांप लिए भी आते हैं। जाहरवीर गोगाजी को सापों के देवता के रूप में भी माना जाता है। हर धर्म व वर्ग के लोग गोगाजी की छाया चढ़ाकर नृत्य की मुद्रा में सांकल खाते व पदयात्रा करते गोगाजी के मंदिर तक पहुंचते हैं। नारियल, बताशे का प्रसाद चढ़ाकर मनौति मांगते हैं |

गोगा के मन्दिर में हिन्दू व मुसलमान दो पुजारी रहते हैं | गोगाजी महाराज जब मुहम्मद गोरी के साथ किया में चुरू जिले में उनका सिर कट कर गिर गया तो उसे शीश मेडी और हनुमान गढ़ में उनका धड गिरा तो उसे धड मेडी कहा जाता हैं भाद्रपद माह मई नवमी को हनुमानगढ़ व चुरू दोनों जिलों में मेले का आयोजन किया जाता हैं जिसमे राजस्थान संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती हैं | राजस्थान के पड़ोसी राज्यों से बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालु मेले का आनंद उठाते हैं |

|| श्री जाहरवीर गोगाजी की आरती ||
जय -जय जाहरवीर हरे,जय -जय गोगावीर हरे ,
धरती पर आकर के भक्तों के कष्ट हरे जय जय —-
जो कोई भक्ति करे प्रेम से , निसादिन करे प्रेम से ,भागे दुःख परे ,
विघ्न हरन मंगल के दाता,जन -जन का कष्ट हरे ,
जेवर राव के पुत्र कहाए,रानी बाछल माता ,
बागड़ में जन्म लिया गुगा ने ,सब जय -जयकार करे ,जय जय ……
धर्म कि बेल बढाई निशदिन ,तपस्या रोज करे
दुष्ट जनों को दण्ड दिया ,जग में रहे आप खरे ,जय -जय ……
सत्य अहिंसा का व्रत धारा ,झुठ से सदा डरे
वचन भंग को बुरा समझ कर , घर से आप निकरे , जय-जय …
माडी में करी तपस्या अचरज सभी करे
चारों दिशाओं से भगत आ रहे ,जोड़े हाथ खड़े ,जय-जय …….
अजर अमर है नाम तुम्हारा ,हे प्रसिद्ध जगत उजियारा
भुत पिशाच निकट नहीं आवे , जो कोई जाहर नाम गावे , जय जय ….
सच्चे मन से जो ध्यान लगावे ,सुख सम्पति घर आवे ,
नाम तुम्हारा जो कोई गावे ,जन्म जन्म के दुःख बिसरावे ,जय-जय …
भादो कृषण नोमी के दिन जो पुजे ,वह विघ्नों से नहीं डरे ,
जय-जय जाहर वीर हरे , जय श्री गोगा वीर हरे …..!

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