India Test Three Fires Missiles

India Test Three Fires Missiles

भारत ने तीन नई  बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया !

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भारत ने हाल ही में एक के बाद एक तीन बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया। जमीन और समुद्र दोनों जगह से लक्ष्य भेदने वाली इन मिसाइलों का परीक्षण सफल रहा है। ओड़िशा के तट और बंगाल की खाड़ी में अग्नि, पृथ्वी और धनुष का परीक्षण किया गया।

धनुष: 350 किलोमीटर दूर तक मार करने वाली धनुष मिसाइल स्वदेशी तकनीक से निर्मित पृथ्वी मिसाइल का नौसैनिक संस्करण है। 8 मीटर 56 सेंटीमीटर लंबी ये मिसाइल परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है। धनुष एक समय में 750 किलोग्राम हथियार ले जा सकती है और हल्के हथियार के साथ 500 किलोमीटर तक मार भी कर सकती है। प्रक्षेपण के समय इसका वजन 4600 किलोग्राम होता है और इससे पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियारों का प्रक्षेपण किया जा सकता है। धनुष को पहले ही सशस्त्र बलों में शामिल किया जा चुका है।

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अग्नि-1 और पृथ्वी-2 : इन दोनों मिसाइलों का भी परीक्षण सफल रहा है। अग्नि-1 मिसाइल का वजन 12 टन है। इसकी लंबाई 15 मीटर है। यह मिसाइल अपने साथ एक टन से अधिक का वजन ले जा सकती है। इस मिसाइल में आधुनिक नेविगेशन प्रणाली है, जिससे निशाना सटीक लगता है। इससे पहले अग्नि-1 का 11 सितंबर 2014 को भी सफल परीक्षण किया गया था। अग्नि-1 मिसाइल का बीते शुक्रवार को सफल परीक्षण किया गया। यह मिसाइल 700 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। यह जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। भारत ने पूरी तरह से स्वदेशी बैलेस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2 का कामयाब परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में किया। यह मिसाइल डीआरडीओ की ओर से तैयार की गई है जो अपने साथ 500 से 1000 किलो वजनी न्यूकलियर हथियार अपने साथ ले जा सकने में सक्षम हैं। इतना ही नहीं पृथ्वी-2 की एक खासियत यह भी है कि यह 350 किलोमीटर तक जमीन से जमीन में मार कर सकने में सक्षम है। पृथ्वी-2 मिसाइल में एडवांस तकनीक के 2 इंजन लगाए गए हैं। जिनकी मदद से इसकी ताकत में खासा इजाफा हुआ है।

2000 किलोमीटर तक कर सकती है मार

22 नवंबर को ही डीआरडीओ ने ओडिशा के अब्दुल कलाम आइलैंड से एंटी बैलिस्टिक मिसाइल का कामयाब परीक्षण किया था जो 2000 किलोमीटर हमला कर सकने में सक्षम हैं। पृथ्वी-2 में युद्धाभ्यास प्रक्षेपपथ (मनूवरिंग ट्रजेक्टरी) के साथ एडवांस इनर्शल गाइडेंस सिस्टम का उपयोग किया गया है जिसकी मदद से यह अपना निशाना सटीक लगा सकने में सक्षम हो जाएगी। पृथ्वी-2 भारतीय सेना में 2003 में लाई गई थी जो पहली मिसाइल थी जो डीआरडीओ के IGMDP एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम की तकनीक के तहत बनाई गई मिसाइल है जो अब दुनिया भर के सामने खुद को साबित कर चुकी है। इससे पहले 19 फरवरी 2015 को आखिरी बार इसका परीक्षण इसी रेंज में में किया गया था। इस तरह के ट्रेनिंग लॉन्च से भारत यह साबित कर करने की ओर है वह रणनीतिक और सामरिक रुप से मजबूत है।

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