Karwa Chauth 2016 Vart Puja VIdhi, Muhurat

Karwa Chauth 2017 Vart Puja VIdhi, Muhurat

Karwa Chauth 2017 Vart Puja VIdhi, Muhurat

Karwa Chauth 2016 Vart Puja VIdhi, Muhurat

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मानाया जाने वाला करवा चौथ महिलाओं के लिए बेहद खास है। इसलिए इस दिन की पूजा भी खास विधि विधान से होती है। दिन भर से भूखी प्यासी निर्जला वृत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा देखने के बाद ही जल पीती हैं और निवाला लेती हैं। पुराणों के अनुसार करवा चौथ पूजन में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। आज के करवा चौथ की पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 43 और 46 मिनट से लेकर 06 बजकर 50 मिनट तक का है। करवा चौथ के दिन चन्द्र को अर्घ्य देने का समय रात्रि 08.50 बजे है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ ही महिलाएं शिव, पार्वती, कार्तिकेय और गणेश की आराधना भी करें। महिलाएं खास ध्यान रखें कि चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास को दी जाती है।

करवा चौथ पूजा मुहूर्त = 17 : 43 से18 : 59

अवधि =1 घण्टा 16 मिनट्स
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय = 20 : 42 बजे
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ = 18 अक्टूबर 2016 को 22 : 47 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त = 19 अक्टूबर 2016 को 19 : 32 बजे

चन्द्रोदय समय (Karwa Chauth Puja Timings in Hindi)

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करवा चौथ का व्रत चन्द्रमा को अर्घ्य देकर की खोलना चाहिए. यह शुभ माना जाता है. इस व्रत को बिना चाँद के निकलने नही खोलना चाहिए. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह अशुभ माना जाता है.

साल 2016 में करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 05 बजकर 43 मिनट से लेकर 06 बजकर 59 मिनट तक

करवा चौथ के दिन चंद्रोदय – रात 8:51 बजे
करवा चौथ व्रत तिथि – 19 अक्टूबर 2016

भारतीय हिन्दू धर्म में उपवास व व्रत का बहुत अधिक महत्व माना जाता हैं ,वर्ष में कई व्रत व त्यौहार आते हैं उनमे से करवा चोथ का व्रत विशेष महत्वपूर्ण माना गया हैं जो कई सुहागिन स्त्रियों के द्वारा अपने पति कई लम्बी आयु कई कामना के लिए किया जाता हैं |यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को आता हैं , कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं। और रात को चाँद के दर्शन कर चन्द्रमा के अर्ध्य देकर अपने चाँद को निवाला खिलाकर अपना व्रत खोलती हैं |इस व्रत के दिन महिलाए करवा बांटती हैं |

यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।भारत देश में वैसे तो चौथ माता जी के कई मंदिर स्थित है, लेकिन सबसे प्राचीन एवं सबसे अधिक विख्यात मंदिर राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गाँव में स्थित है । चौथ माता के नाम पर इस गाँव का नाम बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा पड़ गया । चौथ माता मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी ।

करवा चोथ व्रत पूजन विधि (krwa choth vart pujan vidhi) :-
करवा चौथ व्रत का व्रत कई पूजा के लिए एक पाटे पर जल का लोटा एवं एक कर्वे में गेहूं भरकर रखते हैं ,इस दिन पूजन के लिए दिवार पर या कागज पर चन्द्रमा तथा उसके निचे भगवान शिव और कार्तिकेय की प्रतिमा बनाई जाती हैं | और इसी प्रतिमा कई पूजा स्त्रियों द्वारा की जाती हैं और चोथ माता कई कथा कहती हैंऔर सुनती हैं ,इस व्रत के दिन वे जल व फल ग्रहण नही करती हैं | पुरे दिन कठोर तपस्या के समान उपवास करती है और रत को जब चाँद उदय होता हैं तो उसको अर्ध्य देकर अपने चाँद मुहं देखकर उसे निवाला खिलाकर अपना व्रत खोलती हैं |
प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें।
व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें।
व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें-
प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’
घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर चावलों को पीसे। फिर इस घोल से करवा चित्रित करें। इस रीती को करवा धरना कहा जाता है।
शाम के समय, माँ पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें लकड़ी के आसार पर बिठाए।
माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें।
भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें।
सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत कर व्रत की कथा का श्रवण करें।
सायं काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति द्वारा अन्न एवं जल ग्रहण करें।
पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें।

करवा चौथ के लिए आवश्यक सामग्री ( krwa choth vart pujan Samgri)

करवा चौथ के व्रत को रखने के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की आवश्यकता पड़ती है. इस सामग्री के बिना यह व्रत पूर्ण करना कठिन होता है.
कुंकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे। –

करवा चौथ कि किताब – करवा चौथ के दिन करवा चौथ की कथा पड़ना जरुरी होता है इसलिए जिन महिलाओ को यह कथा याद ना हो वह लोग इस किताब से कथा पड़ सकते हैं. इस कथा को घर की कोई बुजुर्ग महिला या फिर पंडित जी द्वारा पढ़ाया जाता है. यदि यह सम्भव ना हो सके आप इस कथा को स्वयं या किसी कन्या के द्वारा भी पढ़ा सकते हैं.

पूजा थाली – इस व्रत को पूरा करने के लिए पूजा की थाली का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है. इसलिए पूजा की थाली में रोली, चावल, पानी से भरा करवा लोटा, मिठाई, दिया और सिंदूर, स्‍टील की छननी और लाल धागा रखें.

करवा – काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर रख लें. अब इस मिटटी को तांबे के करवा में रखें.

श्रृंगार वस्‍तुएं – करवा चौथ के दिन आप पूरा श्रृंगार का सामान इकत्रित कर लें तथा हाथो में मेहँदी व चुडिया पहने.

पूजन विधि – पूजन विधि करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाये. अब इस वेदी में शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा जी की स्थापना करें. अब इन देवो का पूजन करें.

खाने की वस्‍तुएं- करवा चौथ के दिन आप घर में अलग-अलग प्रकार की मिठाईया बना सकते हैं तथा कचौड़ी, सब्‍जी और अन्‍य व्‍यंजन भी बना सकते हैं.

करवा चोथ व्रत कथा ( Krwa Choth Vart Katha ) :-
बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है,और अपनी भाभीयो से कहती हैं की भाभी चाँद निकल आया हैं आओ हम पूजा कर ले तो उसकी सभी भाभीयां अक साथ बोली की तुम्हारा ही चाँद निकला हैं हमारा तो बाद में निकलेगा | और बहन उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

जब वह पहला निवाला मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा निवाला डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा निवाला मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है। और रोने लगती हैं |

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से ‘यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है।

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।

चौथ माता का मंदिर :

भारत देश में वैसे तो कई मंदिर हैं लेकिन चौथ माता का सुप्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाडा  गांव में स्थित हैं

करवा चौथ शायरी ( Krwa Choth Shayri )

चाँद की पूजा करके, करती हूँ मैं,
तुम्हारी सलामती की दुआ..
तुझे लग जाये मेरी भी उमर,
गम रहे हर पल तुझसे जुदा..

जब तक ना देखें चेहरा आपका..
ना सफल हो ये त्यौहार हमारा..
आपके बिना क्या है ये जीवन हमारा..
जल्दी आओ और दिखाओ अपनी सूरत..
और कर दो करवा चौथ सफल हमारा! हैप्पी करवा चौथ!

चाँद की चमक के साथ..
साँसों की महक के साथ..
श्रद्धा की रात लिए..
विश्वास की सौगात लिए..
पति की मंगल कामना लिए आई है ये ख़ास रात।

इस व्रत की हर रसम निभाऊँगी..
एक सच्ची पत्नी बन कर दिखाऊँगी..
दुनिया की हर खुशी मेरे पति की होगी..
जब बादलों को चीर कर चाँद की एक किरण दिखेगी

करवा चौथ की शुभ कामनायें!

(Krwa Choth Ki Shubh Kamnaye)

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