Navratri 2016 Dates In Hindi | Navratra Shubh Mahurt & Puja Vidhi

Navratri 2017 Dates In Hindi Navratra Shubh Mahurt & Puja Vidhi

Navratri 2017 Dates In Hindi | Navratra Shubh Mahurt & Puja Vidhi

Navratri 2016 Dates In Hindi | Navratra Shubh Mahurt & Puja Vidhi

नवरात्रि एक हिन्दुओ का धार्मिक पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति की देवी माँ दुर्गा के नौ अलग – अलग रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। पौष, चैत्र, आषाढ, अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। लेकिन खास तोर पर चेत्र व आश्विन में ही नवरात्रे किये जाते हैं | नौ रातों में तीन देवियों – महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दुर्गा का मतलब जीवन के दुख कॊ हटानेवाली होता है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में हर्सोल्लास व उत्साह के साथ मनाया जाता है।

नौ देवियाँ है :-

शैलपुत्री – इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
चंद्रघंटा – इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
कूष्माण्डा – इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
स्कंदमाता – इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
कात्यायनी – इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
कालरात्रि – इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
महागौरी – इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।

नवरात्रा घट स्थपना Ghat Establishment :-

इस वर्ष 2017 को शारदीय नवरात्रों का आरंभ 21 सितम्बर , आश्चिन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होगा. दुर्गा पूजा का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है अत: यह नवरात्र घट स्थापना प्रतिपदा तिथि को 21 सितम्बर के दिन की जाएगी. इस दिन सूर्योदय से प्रतिपदा तिथि, हस्त नक्षत्र, ब्रह्म योग होगा, सूर्य और चन्द्रमा कन्या राशि में होंगे|नवरात्रा घट स्थपना शुभ महूर्त में किया जाता हैं | इसके लिए पूजन की आवश्यक सभी सामग्री और माँ दुर्गा की प्रतिमा ,कलश ,आम के पते ,जौ ,मिठाई आदि सभी सामग्री होना आवश्क है |

...

आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है. तथा व्रत का संकल्प लेने के पश्चात ब्राह्मण द्वारा या स्वयं ही मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है. इसी वेदी पर घट ( कलश ) स्थापित किया जाता है. घट ( कलश ) के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है. तथा “दुर्गा सप्तशती” का पाठ किया जाता है. पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिए.और शाम को माँ दुर्गा की आरती की जाती है साथ में प्रसाद वितरण किया जाता हैं |

ये हैं 5 मुख्य वास्तु नियम

नवरात्र में घट (कलश) स्थापना व नौ दिनों तक जलने वाली अखंड ज्योत भी जलाई जाती है। घट स्थापना करते समय यदि वास्तु नियमों का पालन भी किया जाए तो और भी शुभ होता है। इन वास्तु नियमों का पालन करने से माता अति प्रसन्न होती हैं। जानिए इन वास्तु नियमों के बारे में-

1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को देवताओं की दिशा माना गया है। इसी दिशा में माता की प्रतिमा तथा घट स्थापना करना उचित रहता है।.

2. यदि माता प्रतिमा के समक्ष अखंड ज्योत जला रहे हैं, तो इसे आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रखें। पूजा करते समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।.

3. घट की स्थापना चंदन के बाजोट (पटिए) पर करें तो बहुत शुभ होता है। पूजा स्थल के ऊपर यदि टाण्ड हो तो उसे साफ-सुथरी रखें। कोई कपड़ा या गंदी वस्तुएं वहां न रखें।.

4. कई लोग नवरात्र पर ध्वजा भी बदलते हैं। ध्वजा की स्थापना घर की छत पर वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में करें।.

5. पूजा स्थल के सामने थोड़ा स्थान खुला होना चाहिए, जहां आसानी से बैठा जा सके। स्थापना स्थल के आसपास शौचालय या बाथरूम नहीं होना चाहिए।.

6.नवरात्र में माता दुर्गा के सामने नौ दिन तक अखंड ज्योत जलाई जाती है। यह अखंड ज्योत माता के प्रति आपकी अखंड आस्था का प्रतीक स्वरूप होती है। माता के सामने एक एक तेल व एक शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए।.

7.मान्यता के अनुसार, मंत्र महोदधि (मंत्रों की शास्त्र पुस्तिका) के अनुसार दीपक या अग्नि के समक्ष किए गए जाप का साधक को हजार गुना फल प्राप्त हो है। कहा जाता है.

दीपम घृत युतम दक्षे, तेल युत: च वामत:।
अर्थात – घी का दीपक देवी के दाहिनी ओर तथा तेल वाला दीपक देवी के बाईं ओर रखना चाहिए। .

8. अखंड ज्योत पूरे नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए। इसके लिए एक छोटे दीपक का प्रयोग करें। जब अखंड ज्योत में घी डालना हो, बत्ती ठीक करनी हो तो या गुल झाड़ना हो तो छोटा दीपक अखंड दीपक की लौ से जलाकर अलग रख लें। .

9. यदि अखंड दीपक को ठीक करते हुए ज्योत बुझ जाती है तो छोटे दीपक की लौ से अखंड ज्योत पुन: जलाई जा सकती है छोटे दीपक की लौ को घी में डूबोकर ही बुझाएं।.

नवरात्रि में कन्‍या पूजा : –

नवरात्र में सप्‍तमी तिथि से कन्‍या पूजन शुरू हो जाता है| कन्या पूजन तो नौ दिनों तक करना चाहिए और अगर कन्या का हमेशा ही आदर सत्कार करना जरूरी होता हैं क्योकि कन्या को लक्ष्मी व दुर्गा का रूप माना गया हैं और इस दौरान कन्‍याओं को घर बुलाकर उनकी आवभगत की जाती है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन इन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर इनका स्वागत किया जाता है. माना जाता है कि कन्याओं का देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख समृधि का वरदान देती हैं. |

कन्‍या पूजन? क्यों और कैसे किया जाता है

नवरात्र पर्व के दौरान कन्या पूजन का बड़ा महत्व है. नौ कन्याओं को या कन्या विशेष को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है. वह अपने सामर्थ्य श्रद्धा के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं.

किस दिन करें कन्या पूजन

वैसे तो कई लोग सप्‍तमी से कन्‍या पूजन करना शुरू कर देते हैं लेकिन जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत करते हैं वह तिथि के अनुसार नवमी और दशमी को कन्‍या पूजन करने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं. शास्‍त्रों के अनुसार कन्‍या पूजन के लिए दुर्गाष्‍टमी के दिन को सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण और शुभ माना गया है.

कन्या पूजन की विधि

– कन्‍या भोज और पूजन के लिए कन्‍याओं को एक दिन पहले ही आमंत्रित कर दिया जाता है. .

– मुख्य कन्या पूजन के दिन इधर-उधर से कन्याओं को पकड़ के लाना सही नहीं होता है. .

– गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं..

– अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाकर सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर धोने चाहिए और पैर छूकर आशीष लेना चाहिए..

– उसके बाद माथे पर अक्षत, फूल और कुंकुम लगाना चाहिए. .

– फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं. .

– भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें..

कन्या पूजन में कितनी हो कन्याओं की उम्र?

कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए और एक बालक भी होना चाहिए जिसे हनुमानजी का रूप माना जाता है. जिस प्रकार मां की पूजा भैरव के बिना पूर्ण नहीं होती , उसी तरह कन्या-पूजन के समय एक बालक को भी भोजन कराना बहुत जरूरी होता है. यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है.

आयु अनुसार कन्या रूप का पूजन

– नवरात्र में सभी तिथियों को एक-एक और अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं की पूजा होती है.

– दो वर्ष की कन्या (कुमारी) के पूजन से दुख और दरिद्रता मां दूर करती हैं. तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति रूप में मानी जाती है. त्रिमूर्ति कन्या के पूजन से धन-धान्‍य आता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है..

– चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है. इसकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है. जबकि पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है. रोहिणी को पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है..

– छह वर्ष की कन्या को कालिका रूप कहा गया है. कालिका रूप से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है. सात वर्ष की कन्या का रूप चंडिका का है. चंडिका रूप का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है..

– आठ वर्ष की कन्या शाम्‍भवी कहलाती है. इसका पूजन करने से वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है. नौ वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है. इसका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है तथा असाध्य कार्यपूर्ण होते हैं..

– दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है. सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूर्ण करती है..

9 दिन ही नहीं है जीवन भर करें इनका सम्‍मान

नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य और पत्नी को घर की लक्ष्मी मानकर पूजा जाता है. पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं. बहूत जगह कन्याओं का शोषण होता है और उनका अपनाम किया जाता है. आज भी भारत में बहूत सारे गांवों में कन्या के जन्म पर दुःख मनाया जाता है. ऐसा क्यों? क्या आप ऐसा करके देवी मां के इन रूपों का अपमान नहीं कर रहे हैं. कन्याओं और महिलाओं के प्रति हमें अपनी सोच बदलनी चाहिए. देवी तुल्य कन्‍याओं का सम्मान करें. इनका आदर करना ईश्‍वर की पूजा करने जितना पुण्‍य देता है. शास्‍त्रों में भी लिखा है कि जिस घर में औरत का सम्‍मान किया जाता है वहां भगवान खुद वास करते हैं.

नवरात्रों का महत्व :- Significance of Navratri

नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक ओर मानसिक शक्तियों में वृ्द्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते है. सभी नवरात्रों में माता के सभी 51 पीठों पर भक्त विशेष रुप से माता एक दर्शनों के लिये एकत्रित होते है. जिनके लिये वहां जाना संभव नहीं होता है, उसे अपने निवास के निकट ही माता के मंदिर में दर्शन कर लेते है.

नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों का बोध करता है. इस समय शक्ति के नव रुपों कि उपासना की जाती है. इस समय शक्ति के नव रुपों की उपासना की जाती है. रात्रि शब्द सिद्धि का प्रतीक है.

उपासना और सिद्धियों के लिये दिन से अधिक रात्रिंयों को महत्व दिया जाता है. हिन्दू के अधिकतर पर्व रात्रियों में ही मनाये जाते है. रात्रि में मनाये जाने वाले पर्वों में दिपावली, होलिका दशहरा आदि आते है. शिवरात्रि और नवरात्रे भी इनमें से कुछ एक हे.

रात्रि समय में जिन पर्वों को मनाया जाता है, उन पर्वों में सिद्धि प्राप्ति के कार्य विशेष रुप से किये जाते है. नवरात्रों के साथ रात्रि जोडने का भी यही अर्थ है, कि माता शक्ति के इन नौ दिनों की रात्रियों को मनन व चिन्तन के लिये प्रयोग करना चाहिए.

नवरात्रि भारत के विभिन्न भागों में अलग ढंग से मनायी जाती है। गुजरात में इस त्योहार को बड़े पैमाने से मनाया जाता है। गुजरात में नवरात्रि समारोह डांडिया और गरबा के रूप में जान पडता है। यह पूरी रात भर चलता है। डांडिया का अनुभव बडा ही असाधारण है। देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में गरबा, ‘आरती’ से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह उसके बाद। पश्चिम बंगाल के राज्य में बंगालियों के मुख्य त्यौहारो में दुर्गा पूजा बंगाली कैलेंडर में, सबसे अलंकृत रूप में उभरा है। इस अदभुत उत्सव का जश्न नीचे दक्षिण, मैसूर के राजसी क्वार्टर को पूरे महीने प्रकाशित करके मनाया जाता है।

वरात्रि जहां एक और आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त करने का अवसर है वहीं आम जीवन की समस्याओं को सदा-सर्वदा के लिए खत्म करने का भी साधन है। नवरात्रों में किए जाने वाले टोने-टोटके तुरंत असर दिखाते हैं तथा हर समस्या को खत्म कर देते हैं। यही कारण है कि नवरात्रि में त्वरित सफलता पाने के लिए विशेष टोटके किए जाते हैं। तंत्र शास्त्र के अनुसार नवरात्रि में किए गए टोटके जल्दी ही शुभ फल प्रदान करते हैं

धन लाभ के लिए टोटका

नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन एक शांत कमरे में उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने तेल के 9 दीपक जला लें। ये दीपक साधनाकाल तक जलते रहने चाहिए। इन नौ दीपकों के सामने लाल चावल की एक ढेरी बनाकर उस पर एक श्रीयंत्र रख लें।

इस श्रीयंत्र का कुंकुम, फूल, धूप, तथा दीप से पूजन करें। इस पूरी क्रिया के बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसका पूजन करें। अब इस श्रीयंत्र को अपने घर के पूजा स्थल में स्थापित कर दें तथा शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से आपको जल्दी ही अचानक धन लाभ होगा।

नौकरी में सफलता का उपाय

नवरात्रि में किसी भी दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सफेद रंग का सूती आसन बिछाकर उस पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। अब अपने ठीक सामने पीला कपड़ा बिछाकर उस पर 108 मनकों वाली स्फटिक की माला रख दें तथा इस पर केसर व इत्र छिड़क कर माला का पूजन करें।

माला को धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर “ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा” मंत्र का 31 बार जाप करें। इस प्रकार लगातार ग्यारह दिन तक करने से वह माला सिद्ध हो जाएगी। इसके बाद आपको जब भी किसी इंटरव्यू में जाना हो या किसी से मिलने के जाना हो तो इस माला को पहन कर जाएं। ऐसे करने से शीघ्र ही इंटरव्यू तथा अन्य कार्यों में सफलता मिलेगी।

मनपसंद लड़की से शादी के लिए

नवरात्रि के दौरान आने वाले किसी भी सोमवार की सुबह किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाते हुए उसे अच्छी तरह से स्नान कराएं। तत्पश्चात शुद्ध जल चढ़ाएं व पूरे मंदिर में झाड़ू लगाकर उसे साफ करें। अब महादेवजी की चंदन, पुष्प एवं धूप, दीप आदि से पूजा-अर्चना करें। उसी दिन रात 10 बजे बाद अग्नि प्रज्वलित कर “ऊँ नम: शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए घी से 108 आहुति दें।

अब 40 दिनों तक नित्य इसी मंत्र का पांच माला जप भगवान शिव के सम्मुख करें। इससे आपकी मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होगी और आपकी मनपसंद लड़की से शादी होगी।
पति-पत्नी के बीच संबंधों की अनुकूलता के लिए

यदि पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध अच्छे न हो तो नवरात्रि में इस प्रयोग को करें। नवरात्रि के किसी भी दिन स्नान आदि कर निम्नलिखित मंत्र को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें। इससे यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा। इसके बाद रोजाना नित्य सुबह उठकर पूजा के समय इस मंत्र का 21 बार जप अवश्य करें। यदि संभव हो तो अपने जीवनसाथी से भी इस मंत्र का जप करने के लिए कहें। इससे जीवन भर आप दोनों के बीच मधुर संबंध बने रहेंगे।

मंत्र

सब नर करहिं परस्पर प्रीति। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।।

धनी बनने के लिए टोटके

(1) नवरात्रों में एक पीपल के पत्ते पर राम का नाम लिखें तथा साथ में कुछ मीठा रखकर हनुमानजी की प्रतिमा के आगे अर्पण करें। यह उपाय लगातार नौ दिन करना है। जल्दी ही धन लाभ होगा।

(2) नवरात्रि में किसी भी दिन भगवान शिव को सुबह स्नान करने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर चावल तथा बीलपत्र चढ़ाएं।बीलपत्र व द्थुरा शिव जी अति प्रिय हैं | जल्दी ही धन आना शुरू हो जाएगा

शीघ्र विवाह के लिए उपाय

नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करने के पश्चात निम्नलिखित मंत्र का 3, 5 अथवा 10 माला जप करें। शिव पार्वती की पूजा ध्यान मग्न होकर करे न की विचलित मन से | जप के पश्चात भगवान शिव से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इस मंत्र के प्रभाव से जल्दी ही विवाह के आसार बन जाते हैं।

मंत्र

ऊँ शं शंकराय सकल-जन्मार्जित-पाप-विध्वंसनाय, पुरुषार्थ-चतुष्टय-लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।

मनपसंद लड़के से शादी के लिए टोटका

नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन अपने आस-पास स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां भगवान शिव एवं मां पार्वती पर जल एवं दूध चढ़ाएं और पंचोपचार (चंदन,आक के पुष्प, धूप,द्तुरा, दीप एवं नैवेद्य) से उनका पूजन करें। अब मौली से शिव पार्वती के मध्य गठबंधन करें। तत्पश्चात वहीं पर बैठकर लाल चंदन की माला से निम्नलिखित मंत्र का जाप 108 बार करें-

हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।

इसके बाद तीन माह तक नित्य इसी मंत्र का जप शिव मंदिर में अथवा अपने घर के पूजाकक्ष में मां पार्वती के सामने 108 बार जाप करें। घर पर भी आपको पंचोपचार पूजा करनी है। शीघ्र ही भगवान की कृपा से आपकी मनचाहे लड़के से शादी होगी।

घर में पैसा टिकने का उपाय

नवरात्रि में किसी भी दिन सुबह जल्दी ही स्नान कर किसी साफ कपड़े में मोती शंख को रखें। इस पर केसर से स्वस्तिक का चिन्ह बना दें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का स्फटिक माला से 108 बार जप करें-

“श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:”

हर मंत्र जाप के साथ एक-एक चावल इस शंख में डालते जाएं। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों। लगातार नौ दिनों तक इस प्रयोग को करें। रोज 108 बार ही जाप करना है। प्रयोग पूरा होने के बाद पूजा के इन चावलों को एक सफेद रंग के कपड़े की थैली में रखें। ग्यारह दिनों के बाद चावल के साथ शंख को भी उस थैली में रखकर तिजोरी में रख लें। कुछ ही दिनों में आपकी दरिद्रता दूर होकर धन-वैभव में वृद्धि होने लगेगी।

Leave a Reply