Shubh Mahurt for Rakshabandhan 18 August 2016 Happy Rakshabandhan Wish

Shubh Mahurt for Rakshabandhan 07 August 2017 Happy Rakhi Rakhdi Wish

Shubh Mahurt for Rakshabandhan 07 August 2017 Happy Rakshabandhan Wish

Shubh Mahurt for Rakshabandhan 18 August 2016 Happy Rakshabandhan Wish

रक्षाबंधन 2017 के लिए शुभ महूर्त
07 अगस्त (बृहस्पतिवार), 2017
05:55 से 14:56 तक
अपराह्न काल में रक्षाबंधन 2017 के लिए शुभ महूर्त
13:42 से 14:56
(वर्ष 2017 में रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी)
पूर्णिमा तिथि 17 अगस्त ,16:27 से 18 अगस्त, 16:56 तक

Rakshabandhan Ki Hardhik Shubh Kamnaye 07 August 2017 

Shubh Mahurt for Rakshabandhan 18 August 2016 Happy Rakshabandhan Wish

रक्षाबंधन मानो भाई-बहन त्यौहार हैं | यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन का अर्थ. रक्षाबंधन का अर्थ है (रक्षा+बंधन) अर्थात किसी को अपनी रक्षा के लिए बांध लेना। इसीलिए राखी बांधते समय बहन कहती है- ‘भैया! मैं तुम्हारी शरण में हूँ, मेरी सब प्रकार से रक्षा करना।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष 2017 में रक्षा बंधन का त्यौहार खुशियों व उल्लास के साथ 07 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 07 अगस्त 2017 को दोपहर बाद से आरंभ होगा किंतु भद्रा व्याप्त रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 07 अगस्त को संपन्न किया जाए तो अच्छा रहेगा. परंतु परिस्थितिवश यदि भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को त्यागकर भद्रा पुच्छ काल में इसे करना चाहिए.

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जब भी कोई कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में वृ्द्धि होती है. भाई- बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के लिये इस राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त समय में करना चाहिए.

Raksha Bandhan In India Rakhi 2017

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता हैं | क्योकिं भारत में कई त्यौहार मनाये जाते हैं | रक्षा बंधन भी महत्वपूर्ण पर्व हैं , यह भाई – बहन का एक प्यार का रिश्ता बनाने का त्यौहार हैं | रक्षा बंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता हैं , इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र के रूप में राखी बांधती हैं | और भाई – बहन की रक्षा का वचन देता हैं | श्रावण मास में चारों और हरियाली ही हरियाली छाई रहती हैं , जिससे मन में रक्षा बंधन के प्रति और अधिक ख़ुशी रहती हैं |

रक्षा बंधन का त्यौहार भाई बहन के प्रेम का प्रतीक होकर चारों ओर अपनी छटा को बिखेरता सा प्रतीत होता है. सात्विक एवं पवित्रता का सौंदर्य लिए यह त्यौहार सभी जन के हृदय को अपनी खुश्बू से महकाता है. इतना पवित्र पर्व यदि शुभ मुहूर्त में किया जाए तो इसकी शुभता और भी अधिक बढ़ जाती है. धर्म ग्रंथों में सभी त्यौहार एवं उत्सवों को मनाने के लिए कुछ विशेष समय का निर्धारण किया गया है जिन्हें शुभ मुहूर्त समय कहा जाता है, इन शुभ समय पर मनाए जाने पर त्यौहार में शुभता आती है तथा अनिष्ट का भाव भी नही रहता.

Shubh Mahurt for Rakshabandhan 18 August 2016 Happy Rakshabandhan Wish

राखी के इस धागे में वो ताकत होती हैं जो एक वीर योद्धा में होती हैं | राखी के धागे को रक्षा सूत्र माना गया हैं | भारत के इतिहास में भी राखी के इस धागे ने युद्ध को रोक दिया था | रानी कर्मावती ने हुमायु को राखी भेजकर अपना भाई मान कर शेरशाह शुरी से रक्षा मांगी थी |

इसी प्रकार रक्षा का बंधन के शुभ मुहूर्त का समय भी शास्त्रों में निहित है, शास्त्रों के अनुसार भद्रा समय में श्रावणी और फाल्गुणी दोनों ही नक्षत्र समय अवधि में राक्षा बंधन नहीं करना चाहिए. इस समय राखी बांधने का कार्य करना मना है और त्याज्य होता है. मान्यता के अनुसार श्रावण नक्षत्र में राजा अथवा फाल्गुणी नक्षत्र में राखी बांधने से प्रजा का अहित होता है. इसी का कारण है कि राखी बांधते समय, समय की शुभता का विशेष रुप से ध्यान रखा जाता है.

इस वर्ष 2017 में रक्षा बंधन का त्यौहार 07 अगस्त, को मनाया जाएगा. इस वर्ष 2017 में रक्षा बंधन का त्यौहार 07 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 07 अगस्त 2017 को हो जाएगा. परन्तु भद्रा व्याप्ति रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 07 अगस्त को 5:55 से 14:56 या 13:42 से 14:56 तक मनाया जा सकता है.

धर्मशास्त्र के अनुसार किसी त्यौहार एवं उत्सव समय में चौघड़िए तथा ग्रहों के शुभ समय एवं अशुभ समयों को जाना जाता है. रक्षाबंधन के समय में भद्रा काल का त्याग करने की बात कही जाती है, तथा निर्दिष्ट निषेध समय दिया जाता है, अत: वह समय शुभ कार्य के लिए त्याज्य होता है. पौराणिक मान्यता के आधार पर देखें तो भद्रा का उचित नहीं माना जाता क्योंकि जब भद्रा का वास किसी उत्सव समय को स्पर्श करता है तो उसके समय को उपयोग में नहीं लाया जाता है भद्रा में नक्षत्र व तिथि के अनुक्रम तथा पंचक के पूर्वाद्ध नक्षत्र के मान व गणना से इसका समय में बदल सकता है.

मान्यतानुसार भद्रायुक्त काल का वह समय छोड़ देना चाहिए, जिसमें भद्रा के मुख तथा पृच्छ का विचार हो रहा हो, रक्षाबंधन का पर्व भद्रा रहित अपराह्न व्यापिनी पूर्णिमा में करने का विधान है. यदि पहले दिन अपराह्न काल भद्रा व्याप्त हो तथा दूसरे दिन उदयकालिक पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त्त से अधिक हो तो उसी उदयकालिक पूर्णिमा के दोपहर समय में रक्षाबंधन मनाना चाहिए. इस दृष्टि से भद्रा के उक्त समय को छोड़कर रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जा सकता है.

रक्षा के सूत्र के लिए उचित मुहूर्त्त का इंतजार सभि की चाह है पर सबसे खास बात है राखी के साथ कुमकुम रोलौ, हल्दी, चावल, दीपक, अगरबती, मिठाई का उपयोग किया जाता है. कुमकुम हल्दी से भाई का टीका करके चावल का टीका लगाया जाता है और भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है | भाई को मिठाई खिलाई जाती हैं |

अन्य त्यौहारों की तरह इस त्यौहार पर भी उपहार और पकवान अपना विशेष महत्व रखते है.इस दिन पुरोहित तथा आचार्य सुबह सुबह अपने यजमानों के घर पहुंचकर उन्हें राखी बांधते है, और बदले में धन वस्त्र, दक्षिणा स्वीकार करते है. राखी बांधते समय बहनें निम्न मंत्र का उच्चारण करें, इससे भाईयों की आयु में वृ्द्धि होती है. “येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: I तेन त्वांमनुबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल II”

रक्षा बंधन का पर्व जिस व्यक्ति को मनाना है, उसे उस दिन प्रात: काल में स्नान आदि कार्यों से निवृ्त होकर, शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद अपने इष्ट देव की पूजा करने के बाद राखी की भी पूजा करें साथ ही पितृरों को याद करें व अपने बडों का आशिर्वाद ग्रहण करें.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त Auspicious Muhurta for Rakshabandhan
इस वर्ष 2017 में रक्षा बंधन का त्यौहार 18 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 17 अगस्त 2017 को हो जाएगा. परन्तु भद्रा व्याप्ति रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 18 अगस्त को 5:55 से 14:56 या 13:42 से 14:56 तक मनाया जा सकता है.

भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन त्योहार प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. बहने अपने भाईओं की कलाई पर प्रेम और विश्वास के प्रतीक को बांधती हैं और भाई भी आजीवन उनकी रक्षा का दायित्व निभाने का वचन देता है. रक्षाबंधन से सम्बंधित पूजा के लिए हिन्दू पंचांग अनुसार दोपहर के बाद का समय (अपराह्न ) ही सर्वश्रेठ माना गया है. अपराह्न के बाद रक्षाबंधन के लिए केवल प्रदोष काल ही उपयुक्त है.

रक्षाबंधन के लिए सबसे अधिक अनुपयुक्त समय भद्रा माना गया है. भद्रा काल हिन्दू वेदों के अनुसार किसी भी तरह के शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है, इसीलिए जहाँ तक हो सके भद्रा काल में रक्षा बंधन से सम्बंधित कोई भी पूजा नहीं करनी चाहिए.

उत्तर भारत के कई प्रान्तों में प्रातः काल में राखी/ रक्षा सूत्र बंधने की प्रथा है. यहाँ ये बात ध्यान देने लायक है कि पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्थ में भद्रा काल होता है. अतः रक्षा सूत्र या राखी बंधने और पूजन के समय के लिए भद्रा काल के समाप्त हो जाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए.

रक्षाबंधन से सम्बंधित कथा

भविष्य-पुराण के अनुसार प्राचीन काल में देवासुर-संग्राम में देवताओं द्वारा दानव पराजित हो गए . दु:खी होकर वह दैत्यराज बलि के साथ गुरु शुक्राचार्य के पास गये और अपनी पराजय का वृतान्त बतलाया . इस पर शुक्राचार्य बोले – दैत्यराज आपको विषाद नही करना चाहिए . जय-पराजय तो होती ही रहती हैं . इस समय वर्षभर के लिए तुम देवराज इंद्र के साथ संधि कर लो , क्योकि इंद्र-पत्नी शची ने इंद्र को रक्षा-सूत्र बांधकर अजेय बना दिया हैं .

उसी के प्रभाव से दानवेन्द्र ! तुम इंद्र से परास्त हुए हो .एक वर्ष तक प्रतीक्षा करो, उसके बाद तुम्हारा कल्याण होगा . अपने गुरु की बात सुन कर सभी दानव निश्चिन्त हो गये और समय की प्रतीक्षा करने लगे . रक्षा-बन्धन का विलक्षण प्रभाव हैं.

आज के दिन प्रात: ही सारी क्रियाओ से निवृत हो कर श्रुति-स्मृति विधि से स्नान कर देवताओं और पितरों का निर्मल जल से तर्पण करना चाहिए तद्पश्चात बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बंधना चाहिए.|

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