शिक्षक दिन कविता

शिक्षक पर कविता और शायरी Teachers Day Poems And Shayri In Hindi

शिक्षक पर कविता और शायरी Teachers Day Poems And Shayri In Hindi

शिक्षक दिन कविता

भारत में गुरू शिष्य परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। गुरूजनों एवं शिक्षकों को समाज में एक ऊँचा दर्जा प्राप्त है। भारत में गुरू को भगवान से भी बड़ा माना गया है। इस दोहे का भावार्थ है कि गुरू की कृपा से ही शिष्य अपने इष्ट को पा सकता है। गुरू के मार्गदर्शन के बिना शिष्य भटक जायेगा।अध्यापक दिवस गुरूजनों के सम्मान की इस परम्परा का ही प्रतीक है। पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को अध्यापक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डा. राधाकृष्णन एक महान शिक्षक और गुरू थे। उनका जन्मदिन 5 सितम्बर को है। भारतवर्ष में इस दिन को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

डा. राधाकृष्णन का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। अपनी लगन व मेहनत से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। वह पुस्तकों को अपना मित्र और साथी समझते थे। उन्होंने भारत के सर्वोच्च ‘राष्ट्रपति पद’ को सुशोभित किया। अपने जीवन के चालीस वर्ष उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बिताये।

गुरू गोबिन्द दोऊ खड़े, काके लाँगू पाय।
बलिहारी गुरू अपने, जिन गोबिन्द दियो मिलाय।।

इस सूत्र के दो अर्थ हो सकते हैं-दोनों प्रीतिकर हैं।
पहला अर्थ-‘बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताय।’ तो कबीर कहते हैं कि बलिहारी गुरु तुम्हारी कि जब मैं दुविधा में था, तुमने तत्क्षण इशारा कर दिया कि गोविन्द के पैर छुओ। ‘बलिहारी गुरु जिन गोविन्द दियो बताय।’ जैसे ही मैं दुविधा में था आपने इशारा कर दिया कि गोविन्द के पैर छुओ, क्योंकि मैं तो यहाँ तक था। मैं तो राह पर लगे हुए मील के पत्थर की तरह था, जिसका इशारा थाः आ गया, मंजिल आ गई। अब मेरा कोई काम नहीं। अब तुम गुरु को छोड़ो, गोविन्द के पैर छू लो।

...

दूसरा अर्थ है-‘गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काको लागूं पायं। बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताय।।’ दुविधा में हूँ, किसके पैर लगूं। गुरु गोविन्द दोनो खड़े हैं। फिर मैंने गोविन्द को छोड़ा, गुरु के ही पैर छुए ; क्योंकि उसकी ही बलिहारी है, उसी ने गोविन्द को बताया है।
गुरु ज्ञान / गुरु की महत्वता

शिक्षक दिवस कविता

एक गुरु जब जीवन में आये

जीवन के सारे अर्थ बदल जाए ,

सिखा कर वो नित नई बातें

दुनिया की हहक़ीक़त बतलाए ,

 

कभी भूमिका निभाए मित्र की ,

कभी जटिल समस्याओं के रंग दिखाए ,

स्कूल से कॉलेज तक

हर शब्द का वो अर्थ बताए ,

अपने शिष्य की मुश्किल को

जैसे चुटकियों में हल कर जाए ,

बन दीपक वो खुद जल

रोशन शिष्य का जीवन कर जाये ,

गुरु पर्व के इस अवसर पर

आओ हम सब उनके शीश नवाए
नेता नहीं ,एक्टर नहीं, रिश्वत खोर नहीं,
शुक्र हैं टीचर हूँ कुछ और नही…

मैं बाईक में घूमने वाला गरीब हूँ,
न मैं किसी पार्टी के करीब हूँ…
किसी मोदी के मर्डर पर मैं लड़ता नही,
कभी राष्ट्रीयता की बहस पे झगड़ता नहीं..
मैं जन धन का लूटेरा या टैक्स चोर नहीं ,
शुक्र हैं टीचर हूँ कुछ और नहीं…

न मेरे पास मंच पर चिल्लाने का वक्त हैं ,
न मेरा कोई दोस्त अफज़ल याकूब का भक्त हैं…
न मुझे देश में देश से आज़ादी का अरमान हैं,
न मुझे 2-4 पोथे पढ़ लेने का गुमान हैं…
मेरी मौत पर गन्दी राजनीति नहीं, कोई शोर नही,
शुक्र हैं टीचर हूँ कुछ और नही…

मेरे पास मैडल नही वापस लौटाने को,
नक़ली आँसू भी नही बेवजह बहाने को…
न झूठे वादे हैं, न वादा खिलाफी हैं,
कुछ देर चैन से सो लू इतना ही काफी हैं…
बेशक खामोश हूँ मगर कमज़ोर नही,
शुक्र करो कि टीचर हूँ कुछ और नही।

शिक्षक दिवस कविता  शिक्षक तेरा धन्यवाद

आदर्शों की मिसाल बनकर
बाल जीवन संवारता शिक्षक,

सदाबहार फूल-सा खिलकर
महकता और महकाता शिक्षक,

शिक्षक तेरा धन्यवाद ,  दिया है तुमने हमें वरदान ,
हूँ जहाँ भी मैं उसमें  तेरा है बड़ा योगदान,
नहीं है शब्द कैसे करूं मैं तेरा धन्यवाद,
बस चाहिए तेरा आशीर्वाद,
शिक्षक की महिमा कभी होगी ना कम,
भले कर लें कितनी ही उन्नति हम,
शिक्षक तेरा धन्यवाद!

शिक्षक तू है शिक्षा का सागर,
शिक्षक बांटे सबको ज्ञान बराबर,
शिक्षक तू है मेरा भगवान्,
माता पिता का है तू दूजा, नाम

प्यासे को जैसे मिलता पानी ,
शिक्षा तू है वो ही एक जिंदगानी ,
शिक्षक तू ना देखे किसी जात-पात ,
तू न करता कभी किसी में पक्ष-पात ,
निर्धन हो या हो धनवान ,
तू सबको समझे एक-सामान ,

शिक्षक तू है मांझी नाव- किनारा  ,
तू ही देता डूबते को किनारा ,
शिक्षक तू सदा ही कहता –
“श्रम लगन है सच्चा गहना ”
शिक्षक तेरा धन्यवाद,
तुझको करता हूँ मैं शत-शत प्रणाम

गुरु पर अनमोल वचन
आत्मनो गुरुः आत्मैव पुरुषस्य विशेषतः |
यत प्रत्यक्षानुमानाभ्याम श्रेयसवनुबिन्दते ||
आप ही स्वयं अपने गुरू हैं | क्योंकि प्रत्यक्ष और अनुमान के द्वारा पुरुष जान लेता है कि अधिक उपयुक्त क्या है |
छोटे दिमागों को आकार देने में एक बड़े दिल की ज़रुरत पड़ती है.
बेहतरीन शिक्षक दिल से पढातें हैं किताबों से नहीं.
एक गुरु अनंत काल तक को प्रभावित करता है, वह यह नहीं कह सकता की उसका प्रभाव कहाँ जाकर ख़त्म होगा

शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जी वन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। इस वजह से हमारा राष्ट्र ढ़ेर सारे प्रकाश के साथ प्रबुद्ध हो सकता है। इसलिये, देश में सभी शिक्षकों को सम्मान दिया जाता है। अपने शिक्षकों के महान कार्यों के बराबर हम उन्हें कुछ भी नहीं लौटा सकते हालाँकि, हम उन्हें सम्मान और धन्यावाद दे सकते हैं। हमें पूरे दिल से ये प्रतिज्ञा करनी चाहिये कि हम अपने शिक्षक का सम्मान करेंगे क्योंकि बिना शिक्षक के इस दुनिया में हम सभी अधूरे हैं।

” गुरु बिन ज्ञान नही ज्ञान बिन मुक्ति “
हमारे शास्त्रों व पुराणों में गुरु का महत्व बहुत अधिक माना जाता है ,ऐसा माना गया हैं कि जिस व्यक्ति ने कोई गुरु नही बनाया तो उसकी मुक्ति का मार्ग नही हैं |इसलिए प्राचीन समय से ही गुरु का आदर व महत्व चला आ रहा हैं |

Most Popular On JobsHint
शिक्षक दिवस सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय पर ... भारतीय शिक्षक दिवस on 5th September Dr. Sarvepalli Radhakrishnan congratulations शिक्षक दिवस गु...

Leave a Reply