Teej Date 2017 Vart Puja Vidhi Katha Importance

हरियाली Teej Festival 2017 Teej Vart Pujan Vidhi Katha In Hindi

भारत देश में त्यौहारों पर्व व व्रत का बड़ा ही महत्व माना जाता हैं हिन्दू धर्म में कई त्यौहार जो व्रत के दिन ही मनाये जाते हैं इस दिन महिलाये व्रत भी करती हैं और कहानी सुनकर अपने व्रत को पूर्ण करती हैं | तीज का त्यौहार भी व्रत के दिन ही मनाया जाएगा | तीज सावन का महिना आते ही सभी के मन में एक ख़ुशी की लहर जाती हैं | क्योकि ” सावन का महिना तेरा भी कहना “ सावन के महीने में भगवान इंद्र मेहरबान हो जाते हैं और चारो और हरियाली छा जाती हैं | मानो ऐसा लगता हैं की “धरती माता भी स्वर्ग के समान “ लगती और ऐसा अनुभव किया जाता हैं | सावन के महीने के आरम्भ से ही त्योहारों का शूभारम्भ हो जाता हैं | श्रावण महीने के आरम्भ में ” गुरु पूर्णिमा ” आती हैं | सावन का महिना हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व रखता हैं इस महीने भगवान शिव – माता पार्वती की पूजा की जाती हैं |हरियाली तीज 2017 कब हैं तीज व्रत पूजा विधि कथा तीज महत्व

तीज सामान्य भाषा में उस जीव को कहते हैं जो बरसात के मौसम लाल रंग का कोमल व सुंदर दिखाई देता हैं | यह माना जाता हैं की यह तीज , तीज पर्व के बाद में दिखाई नही देता हैं |

तीज त्यौहार 2017 कब हैं :-

तीज का त्यौहार सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को 26 जुलाई 2017 को पुरे भारत में हर्सोल्लास के साथ मनाया जाएगा | यह पर्व विशेष महिलाओं व कुवारी बालिकाओ के लिए होता हैं | वैसे तो इस दिन का आनंद सभी लोग लेते हैं लेकिन महिलाए कुछ विशेष रूप से इस त्यौहार लिए तैयारी करती हैं | वे तीज पर्व से एक दिन पहले अपने हाथो व पैरों पर मेहँदी लगाती हैं और दुसरे दिन अपने सौभाग्य के लिए और अपने पति परमेश्वर की लम्बी आयु के लिए व्रत रखती हैं |

तीज व्रत पूजा कथा 2017 :-

तीज का त्यौहार सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता हैं | इस दिन महिलाए अपने सौभाग्य व पति की दीर्घ आयु के लिए भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा आराधना कर कथा सुनी जाती हैं इस दिन महिलाए सुबह अपने गृहणी कार्य से निवर्त होकर स्नान आदि करके मन्दिर में पूजा के लिए जाती हैं और पूजा के बाद में कथा का वाचन करती हैं उसके बाद में भगवान शिव के भजन गाये जाते हैं ,शाम को चन्द्रमा के अर्ध्य या अरग देकर अपने व्रत को पूर्ण करती हैं यह व्रत सुहागिन महिलाए के जीवन में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता हैं और इसी के साथ ” कुवारी बालिकाए भी सुयोग्य पति पाने के लिए “ भगवान शिव व माता गौरी की पूजा करती हैं |

तीज पर्व कैसे मनाया जाता हैं :-

सावन माह के आरम्भ होने के कुछ दिनों बाद ही चारों और पेड़ो पर झूले डाले जाते हैं तीज पर्व से पहले ही लोग झूले का आनंद लेते हैं | और महिलाये तीज पर्व से एक दिन पूर्व ” सिंधारा / सिंजारा “ के दिन अपने हाथ पैरों पर मेहँदी लगाती हैं | इसके बाद में दुसरे दिन महिलाए सुबह स्नान आदि करके मन्दिर में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा से निवर्त होकर कथा वाचन के बाद में घर आकर कई प्रकार के व्यंजन मिठाई बनाई जाती हैं | और सब मिलकर घर में ख़ुशी के साथ मनाते हैं महिलाए झूले झूलते समय तीज के गीत गाये जाते हैं | राजस्थान में झुला जुलते समय नव विवाहिता से उसके पति का नाम पूछा जाता हैं |

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तीज त्यौहार पर कुवारी बालिकाए किसी तालाब के किनारे जाकर तीज खेलती हैं गीत गाती हुई उन्हें पुजती भी हैं

तीज का महत्व : –

तीज का महत्व भारत देश में महिलाओ व कुवारी बालिकाओ के लिए बहुत माना जाता हैं इस दिन महिलाए भगवान शिव और माता पार्वती से अपने सुहाग की रक्षा के लिए आशीर्वाद मांगती हैं | और बालिकाए भगवान शंकर से उन्ही के जैसा पति प्राप्त होने का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं | यह एक सांस्कृतिक त्यौहार होते हुए भी मौसमी या मानसूनी त्यौहार की श्रेणी में आता हैं क्योकि इस समय मानसून अपने सक्रिय रूप में रहता हैं | यह नव विवाहिताओ के लिए महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता हैं क्योकि तीज पर्व से एक दिन पहले विवाहिता के लिए वर पक्ष वाले सिंधारा लाते हैं | भारत देश एक कृषि प्रदान होने के कारण यह भी बड़ा ही महत्व माना जाता हैं इस समय लगभग सारी खेती की बुवाई कर दी जाती हैं | जिससे खेत भी फसलो से हरे भरे दिखाई देते हैं |

सिंधारा / सिंजारा : –

भारत देश सांस्कृतिक व रीतिरिवाज पर आधारित नियमो का पालन करता हैं और यह इस देश की सांस्कृतिक के लिए आवश्यक हैं | भारत में नव विवाहिता के लिए सावन माह में तीज त्यौहार के एक दिन पहले वर पक्ष वाले / ससुराल पक्ष की तरफ से वधु के लिए सिंधारा लाया जाता हैं | यह रस्म जब निभाई जाती हैं जी वर्ष उनकी शादी वाली साल में सावन के महीने के शुभारम्भ होते ही वह अपने पीहर चली जाती हैं तब यह सिंजारा उनके पीहर में लेकर जाते हैं | जसमे कई प्रकार की मिठाई , फल , कपड़े , आदि नव विवाहिता के लिए लाये जाते हैं | जिसे वह अपने गाँव ढाणी , मोहल्ले में बाटती हैं | वधु पक्ष वाले उनका स्वागत करते हैं और उनकी विदाई के समय नकद ,( जुहारी ) देकर विदा किया जाता हैं

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