AIDS क्या हैं ? एड्स केसे होता हैं,एड्स के लक्षण,और बचाव

AIDS क्या हैं ? एड्स केसे होता हैं,एड्स के लक्षण,और बचाव

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एड्स क्‍या है ? What are AIDS

एड्स एक वायरस जनित महामारी हैं , एड्स स्वयं कोई बीमारी नही है एड्स एक एसी बीमारी हैं जो किसी दुसरे आदमी के स्पर्स से,असुरक्षित यौन संबंध ,एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाला व्‍यक्ति।
वेश्‍यावृति करने वालों से यौन सम्‍पर्क रखने वाला व्‍यक्ति,नशीली दवाईयां इन्‍जेकशन के द्वारा लेने वाला व्‍यक्ति,यौन रोगों से पीडित व्‍यक्ति,पिता व माता के एच.आई.वी. संक्रमण के पश्‍चात पैदा होने वाले बच्‍चें, आदि कारणों से एड्स फैलती हैं |

AIDS(Acquired Immune Deficiency Syndrome) – HIV (Humane Immune Virous). नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्‍ताह के बाद ही रक्‍त की जॉंच से ज्ञात होता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है, ऐसे व्‍यक्ति को HIV पोजिटिव कहते हैं। HIV पोजिटिव व्‍यक्ति कई वर्षो तक सामान्‍य प्रतीत होता है और सामान्‍य जीवन व्‍यतीत कर सकता है, लेकिन दूसरो को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है।

एड्स केसे होता हैं – How to Aids

एड्स फैलने के कई कारण हैं जो निचे दिए गए हैं |

1. असुरक्षित यौन संबंध ,
2. एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाला व्‍यक्ति।
3. वेश्‍यावृति करने वालों से यौन सम्‍पर्क रखने वाला व्‍यक्ति,
4. नशीली दवाईयो व इन्‍जेकशन का सेवन ,
5. यौन रोगों से पीडित व्‍यक्ति,
6. असुरक्षित यौन संबंधो,
7. रक्त के आदान-प्रदान तथा माँ से शिशु में संक्रमण द्वारा
8. पिता व माता के HIV संक्रमण के पश्‍चात पैदा होने वाले बच्‍चें, आदि कारणों से एड्स फैलती हैं |

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एड्स के लक्षण – AIDS symptoms

एड्स एक एसी बीमारी हैं जो धीरे धीरे फैलती हैं इसके लक्षण धीरे धीरे सामने आते हैं -जो आदमी को एकदम कमजोर बनादेते हैं ,AIDS के कुछ लक्षण जो निचे –

  • अत्यधिक वजन का कम होना।
  • अधिक समय तक सुखी खांसी आना।
  • बार-बार बुखार आना।
  • लसिकाओ / ग्रन्थियों में सूजन।
  • एक हफ्ते से अधिक समय तक पतले दस्त होना।
  • बार-बार Fungal Infection होना।
  • रात को पसीना आना।
  • चमड़ी के निचे, मुंह, पलको के निचे या नाक में लाल, भूरे, बैंगनी या गुलाबी रंग के धब्बे होना।
  • याददाश कम होना।
  • शरीर में दर्द होना।
  • मानसिक रोग।
  • लगातार थकान
  • रात sweats
  • वजन में कमी
  • लगातार डायरिया
  • दृष्टि ,जीभ या मुँह पर सफेद धब्बे
  • सूखी खांसी
  • सांस की तकलीफ
  • 37 C (100F) से ऊपर का बुखार
  • सूजन ग्रंथियों कि अधिक से अधिक तीन महीनों के लिए पिछले

Hiv से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण नहीं दिखते। एड्स के मरीज़ों को ज़ुकाम या बुखार हो जाता है पर इससे एड्स होने की पहचान नहीं होती। एड्स के कुछ शुरूआती लक्षण हैं जो निचे दिय गये हैं |

एड्स से कैसे बचें – How to Avoid AIDS

एड्स का बचाव करने के लिए बहुत से उपाय हैं जो आदमी आसानी से कर सकता हैं | Aids के बचाव के लिए कुछ उपाय निचे दिए गए हैं ,जो निम्न प्रकार से हैं |

  • अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें। एक से अधिक व्यक्ति से यौनसंबंध ना रखें।
  • यौन संबंध (मैथुन) के समय कंडोम का सदैव प्रयोग करें।
  • यदि आप एच.आई.वी संक्रमित या एड्स ग्रसित हैं तो अपने जीवनसाथी से इस बात का खुलासा अवश्य करें। बात छुपाये रखनें तथा इसी स्थिती में यौन संबंध जारी रखनें से आपका साथी भी संक्रमित हो सकता है और आपकी संतान पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
  • यदि आप एच.आई.वी संक्रमित या एड्स ग्रसित हैं तो रक्तदान कभी ना करें।
  • रक्त ग्रहण करने से पहले रक्त का एच.आई.वी परीक्षण कराने पर ज़ोर दें।
  • यदि आप को एच.आई.वी संक्रमण होने का संदेह हो तो तुरंत अपना एच.आई.वी परीक्षण करा लें।

विश्व एड्स दिवस World AIDS Day

विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर को मनाया जाता है। एड्स एक ख़तरनाक रोग है, मूलतः असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एड्स के जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इस बीमारी का काफ़ी देर बाद पता चलता है और मरीज भी HIV टेस्ट के प्रति सजग नहीं रहते, इसलिए अन्य बीमारी का भ्रम बना रहता है।

एड्स जागरूकता पर निबंध – Essays on AIDS

एड्‌स (Aids)एक जानलेवा बीमारी है जो धीरे-धीरे पुरे विश्व मैं फैलती जा रही है । दुनियाभर के चिकित्सक व वैज्ञानिक वर्षों से इसकी रोकथाम के लिए औषधि की खोज में लगे हैं परंतु अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है ।

एड्‌स का पूरा नाम ‘ऐक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिन्ड्रोम’ (Acquired Immune Deficiency Syndrome)है ।

आज विश्व एड्स दिवस है। विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर को मनाया जाता है। एड्स एक ख़तरनाक रोग है जो व्यक्ति एड्‌स से ग्रसित हैं उनमें HIV वायरस अर्थात् विषाणु पाए जाते हैं । आज विश्वभर में एड्‌स से प्रभावित लोगों की संख्या चार करोड़ से भी ऊपर पहुँच गई है । अकेले दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया में ही लगभग एक करोड़ लोग HIV से संक्रमित हैं ।जो व्यक्ति एड्‌स से पीड़ित हो गए हैं उनके अंदर धीरे-धीरे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त होती चली जाती है । एड्‌स हाथ मिलाने अथवा छूने से नहीं फैलता है । एड्‌स से ग्रसित लोग हमारी तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं । अत: हमें उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए ।

भारत में भी यह रोग फैलता जा रहा है । हम सब की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि हम पूरी सावधानी बरतें तथा इसके प्रति सभी को जागरूक बनाने का प्रयास करें। भारत सरकार भी इसे काफी प्रमुखता दे रही है ।दूरदर्शन, समाचार-पत्रों तथा अन्य संचार माध्यमों के द्‌वारा एक साथ अभियान छेड़ा गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें । जगह-जगह एड्‌स सलाहकार केंद्र स्थापित किए गए हैं जहाँ से लोग अपने प्रश्नों का उत्तर प्राप्त कर सकते हैं ।अस्पतालों में केवल ‘डिस्पोजेबल’ सुई का प्रयोग किया जा रहा है । एड्‌स का फैलाव चूँकि मुख्य रूप से महानगरीय संस्कृति के कारण अधिक हो रहा है, अत: महानगरों में स्वयंसेवी संस्थाओं द्‌वारा और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है । देह-व्यापार के केंद्रों पर जाकर काम करना, वहाँ चेतना फैलाना हमारे समाज के उत्थान के लिए तथा इस रोग से बचाव के लिए अपरिहार्य बन गया है ।आशा है कि शीघ्र ही वैज्ञानिक इस जानलेवा बीमारी का निदान ढूँढ लेंगे जिससे जल्द ही विश्व को एड्‌स मुक्त किया जा सकेगा । इसलिय सभी लोगों से निवेदन हैं की एड्स के बड़ते प्रभाव से बचे |

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